सीबीआई की तरफ से पैरवी करने दो वकील पहुंच गए, जज के सामने कहासुनी हुई

सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में उस वक्त भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, जब जांच एजेंसी की तरफ से पैरवी करने के लिए दो-दो वकील कोर्टरूम में पहुंच गए। एडिशनल सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी और वकील के राघवाचार्युलु के बीच इस बात को लेकर जज के सामने कहासुनी भी हुई।

राघवाचार्युलु ने बनर्जी की मौजूदगी पर ऐतराज जताया

जस्टिस नजमी वजीरी ने सीबीआई घूसखोरी मामले में आरोपी अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। दोनों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर खारिज करने की मांग की है। सीबीआई की ओर से पहली बार एएसजी विक्रमजीत बनर्जी कोर्टरूम पहुंचे। विक्रमजीत ने कहा कि इस मामले में उन्हें सीबीआई की ओर से पैरवी करने का निर्देश दिया गया है। के राघवाचार्युलु इस मामले की शुरुआत यानी 23 अक्टूबर से ही सीबीआई की ओर से पैरवी कर रहे थे। उन्होंने बनर्जी की मौजूदगी पर ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जब याचिका दायर की गई थी, उस समय से ही उन्हें एजेंसी की तरफ से पैरवी करने के लिए नियुक्त किया गया था।

बनर्जी बाद में कोर्टरूम नहीं पहुंचे, अदालत ने पूछा- एएसजी कहां हैं?

बाद में बनर्जी ने अदालत से कहा कि वह इस मामले में सक्षम अधिकारी से निर्देश लेंगे और यह स्पष्ट करेंगे कि दोनों (राघवाचार्युलु और बनर्जी) में से कौन एजेंसी की तरफ से पैरवी करेगा। थोड़ी देर बाद जब घूसखोरी मामले में बिचौलिए मनोज प्रसाद की याचिका पर अदालत ने सुनवाई शुरू की, तब एएसजी बनर्जी कोर्ट रूम में मौजूद नहीं थे। बनर्जी की गैरमौजूदगी पर अदालत ने पूछा- एएसजी कहां हैं? इस पर राघवाचार्युलु ने कहा कि उन्होंने मुझे एजेंसी की तरफ से पैरवी करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा- एएसजी भी वकील हैं। अगर उन्हें इस अदालत में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं तो वे मौजूद रहें। अगर वह यहां नहीं हैं तो आप पैरवी जारी रखें। सुनवाई के बाद राघवाचार्युलु ने मीडिया से कहा- मुझे इस मामले में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया गया था। सुनवाई से पहले मुझे आश्वस्त किया गया था कि एएसजी को सीबीआई ने पैरवी के लिए नहीं कहा था।

अस्थाना के खिलाफ कार्रवाई पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि 14 नवंबर तक राकेश अस्थाना के खिलाफ कार्रवाई पर यथास्थिति बरकरार रखी जाए। सीबीआई ने अस्थाना की ओर से दायर याचिका का विरोध किया, जिसमें एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी।

सीबीआई ने कहा- अस्थाना के खिलाफ सबूत
सीबीआई ने कहा इस मामले में अस्थाना के खिलाफ दोष साबित करने वाले तथ्य हैं। इस मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। हम आरोपियों के खिलाफ जांच करने में अभी लाचार हैं, क्योंकि इस मामले की फाइल और दस्तावेज अभी केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के पास भेजी गई हैं। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें डायरेक्टर आलोक वर्मा के खिलाफ 12 नवंबर तक जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

माेइन कुरैशी के मामले की जांच से शुरू हुआ रिश्वतखोरी विवाद
1984 आईपीएस बैच के गुजरात कैडर के अफसर अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े मामले की जांच कर रहे थे। इस जांच के दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख रुपए के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी। सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में उसे क्लीन चिट देने के लिए 5 करोड़ रुपए मांगे थे। हालांकि, 24 अगस्त को अस्थाना ने सीवीसी को पत्र लिखकर डायरेक्टर आलोक वर्मा पर सना से दो करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया था।

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