गणतंत्र दिवस से पहले दिल्ली में आतंकी हमले की साजिश रच रहे जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया. जिससे एक बड़ा संभावित आतंकी हमला टल गया है.
बताया जाता है कि दिल्ली पुलि की स्पेशल सेल की एक टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर श्रीनगर में हाल ही में हुए सिलसिलेवार ग्रेनेड हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल लतीफ गनाई को सोमवार को गिरफ्तार किया है.
रिपोर्ट़स के मुताबिक, 'आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य अब्दुल लतीफ गणतंत्र दिवस समारोह के समय दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाके में उसी तरह के हमले की योजना बना रहा था.'
पुलिस अफसरों ने बताया कि स्पेशल सेल की एक टीम मंगलवार को जम्मू-कश्मीर गई और वहां से दो ग्रेनेड और कुछ गोला-बारूद बरामद किए. टीम ने इसके अलावा बांदीपोरा से एक अन्य आतंकवादी हिलाल को भी गिरफ्तार किया, जिसने दिल्ली में कुछ जगहों की रेकी की थी.'
काफी लंबी मशक्कत और इंतजार के बाद पुलिस को इन आतंकियों को पकड़ने में कामयाबी मिली है. 20 जनवरी को पुलिस इंस्पेक्टर शिव कुमार को जानकारी मिली थी कि अब्दुल लतीफ गनी रात में किसी से मिलने के लिए राजघाट के पास आने वाला है.
सूचना मिलने पर राजघाट के पास एक टीम तैनात की गई. आखिरकार 20 और 21 जनवरी के दरमियानी रात अब्दुल लतीफ गनी को पकड़ लिया गया.
एक दर्जन से ज्यादा हथगोले और IED खरीदे थे. गिरफ्तार आतंकवादियों के पास से दो हैंड ग्रेनेड और एक ऑटोमेटिक पिस्तौल समेत 26 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. साथ ही ऑपरेशन कमांडर अबू मौज, जिला कमांडर तल्हा भाई और जिला कमांडर उमैर इब्राहिम के नाम पर जैश-ए-मोहम्मद के तीन रबर स्टैम्प भी बरामद किए गए.
अब्दुल लतीफ के साथी आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एसीपी अत्तर सिंह की अगुवाई में एक टीम को तुरंत जम्मू-कश्मीर रवाना किया गया है.
अब्दुल लतीफ हाल ही में श्रीनगर सहित जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में हथगोले फेंकने और बांदीपोरा में हमले का मास्टरमाइंड रहा है. अब्दुल लतीफ़ शादीशुदा है और उसकी 2 महीने की बेटी है. पुलिस अफसरों ने बताया कि हम आतंकी योजना के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए गनाई से पूछताछ कर रहे हैं.
बता दें कि देश में राजधानी समेत कई अहम हिस्सों में महत्वपूर्ण त्योहारों और स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोहों से पहले कई गुना बढ़ जाते हैं.
संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि साल 1930 में 26 जनवरी को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'पूर्ण स्वराज' का ऐलान किया था.
भारत के गणतंत्र की यात्रा कई सालों पुरानी है, जो 1930 में शुरू हुई थी. जिसके बाद सन 1930 से 15 अगस्त 1947 तक पूर्ण स्वराज दिवस यानी 26 जनवरी को ही स्वतत्रंता दिवस मनाया जाता था.
जब गणतांत्रिक राष्ट्र का हुआ ऐलान
गणतंत्र राष्ट्र के बारे में 31 दिसंबर 1929 को रात में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र में विचार किया गया था. जिसके लिए एक बैठक आयोजित की गई थी. यह बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी.
इसी बैठक में हिस्सा लेने वाले लोगों ने पहले 26 जनवरी को "स्वतंत्रता दिवस" के रूप में मनाने की शपथ ली थी, जिससे कि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्वतंत्रता के सपने को साकार किया जा सके.
इसके बाद लाहौर सत्र में नागरिक अवज्ञा आंदोलन की रूपरेखा तैयार हुई और यह फैसला लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को 'पूर्ण स्वराज दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. वहीं इसी दिन देश का झंडा फहराया गया और 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की शपथ ली गई थी. इसके लिए सभी क्रांतिकारियों और पार्टियों ने एकजुटता दिखाई थी.
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने की 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा
जहां भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था. लेकिन जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अस्तित्व में आया तब भारत को अपनी ताकत का अहसास हुआ. देश का संविधान 2 साल, 11 महीने और 17 दिन में तैयार किया गया था. ये कहना गलत नहीं होगा कि सही मायने में भारत को आजादी 26 जनवरी को ही मिली थी. जिसके बाद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी को देशभर में गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा की.
बताया जाता है कि दिल्ली पुलि की स्पेशल सेल की एक टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर श्रीनगर में हाल ही में हुए सिलसिलेवार ग्रेनेड हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल लतीफ गनाई को सोमवार को गिरफ्तार किया है.
रिपोर्ट़स के मुताबिक, 'आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य अब्दुल लतीफ गणतंत्र दिवस समारोह के समय दिल्ली के भीड़-भाड़ वाले इलाके में उसी तरह के हमले की योजना बना रहा था.'
पुलिस अफसरों ने बताया कि स्पेशल सेल की एक टीम मंगलवार को जम्मू-कश्मीर गई और वहां से दो ग्रेनेड और कुछ गोला-बारूद बरामद किए. टीम ने इसके अलावा बांदीपोरा से एक अन्य आतंकवादी हिलाल को भी गिरफ्तार किया, जिसने दिल्ली में कुछ जगहों की रेकी की थी.'
काफी लंबी मशक्कत और इंतजार के बाद पुलिस को इन आतंकियों को पकड़ने में कामयाबी मिली है. 20 जनवरी को पुलिस इंस्पेक्टर शिव कुमार को जानकारी मिली थी कि अब्दुल लतीफ गनी रात में किसी से मिलने के लिए राजघाट के पास आने वाला है.
सूचना मिलने पर राजघाट के पास एक टीम तैनात की गई. आखिरकार 20 और 21 जनवरी के दरमियानी रात अब्दुल लतीफ गनी को पकड़ लिया गया.
एक दर्जन से ज्यादा हथगोले और IED खरीदे थे. गिरफ्तार आतंकवादियों के पास से दो हैंड ग्रेनेड और एक ऑटोमेटिक पिस्तौल समेत 26 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. साथ ही ऑपरेशन कमांडर अबू मौज, जिला कमांडर तल्हा भाई और जिला कमांडर उमैर इब्राहिम के नाम पर जैश-ए-मोहम्मद के तीन रबर स्टैम्प भी बरामद किए गए.
अब्दुल लतीफ के साथी आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एसीपी अत्तर सिंह की अगुवाई में एक टीम को तुरंत जम्मू-कश्मीर रवाना किया गया है.
अब्दुल लतीफ हाल ही में श्रीनगर सहित जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में हथगोले फेंकने और बांदीपोरा में हमले का मास्टरमाइंड रहा है. अब्दुल लतीफ़ शादीशुदा है और उसकी 2 महीने की बेटी है. पुलिस अफसरों ने बताया कि हम आतंकी योजना के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए गनाई से पूछताछ कर रहे हैं.
बता दें कि देश में राजधानी समेत कई अहम हिस्सों में महत्वपूर्ण त्योहारों और स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोहों से पहले कई गुना बढ़ जाते हैं.
संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख को इसलिए चुना गया क्योंकि साल 1930 में 26 जनवरी को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 'पूर्ण स्वराज' का ऐलान किया था.
भारत के गणतंत्र की यात्रा कई सालों पुरानी है, जो 1930 में शुरू हुई थी. जिसके बाद सन 1930 से 15 अगस्त 1947 तक पूर्ण स्वराज दिवस यानी 26 जनवरी को ही स्वतत्रंता दिवस मनाया जाता था.
जब गणतांत्रिक राष्ट्र का हुआ ऐलान
गणतंत्र राष्ट्र के बारे में 31 दिसंबर 1929 को रात में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र में विचार किया गया था. जिसके लिए एक बैठक आयोजित की गई थी. यह बैठक पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी.
इसी बैठक में हिस्सा लेने वाले लोगों ने पहले 26 जनवरी को "स्वतंत्रता दिवस" के रूप में मनाने की शपथ ली थी, जिससे कि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्वतंत्रता के सपने को साकार किया जा सके.
इसके बाद लाहौर सत्र में नागरिक अवज्ञा आंदोलन की रूपरेखा तैयार हुई और यह फैसला लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को 'पूर्ण स्वराज दिवस' के रूप में मनाया जाएगा. वहीं इसी दिन देश का झंडा फहराया गया और 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाने की शपथ ली गई थी. इसके लिए सभी क्रांतिकारियों और पार्टियों ने एकजुटता दिखाई थी.
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने की 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा
जहां भारत देश अंग्रेजों की गुलामी से 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था. लेकिन जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान अस्तित्व में आया तब भारत को अपनी ताकत का अहसास हुआ. देश का संविधान 2 साल, 11 महीने और 17 दिन में तैयार किया गया था. ये कहना गलत नहीं होगा कि सही मायने में भारत को आजादी 26 जनवरी को ही मिली थी. जिसके बाद देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी को देशभर में गणतंत्र दिवस मनाने की घोषणा की.
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