जब अपने दोस्त अमिताभ से नाराज हो गए थे कादर खान, किया था तंज

अमिताभ बच्चन और खान ने कई फिल्मों में एक साथ काम किया था. दो और दो पांच, मुकद्दर का सिकंदर, मिस्टर नटवरलाल, सुहाग, कुली और शहंशाह जैसी फिल्मों में अमिताभ और कादर खान ने साथ-साथ काम किया. कादर खान एक बेहतरीन अभिनेता के साथ-साथ बेहतरीन डायलॉग राइटर भी थे. उन्होंने सुपरहिट फिल्म कुली नंबर-1 समेत कई फिल्मों के लिए डायलॉग लिखे थे.

अमिताभ बच्चन ने अपनी कई सुपरहिट फिल्मों शराबी (1984), कुली (1983), लावारिस (1981), मुकद्दर का सिकंदर (1978), अमर अकबर, एंथनी (1977), सत्ते पे सत्ता (1982) और अग्निपथ (1990) में कादर खान के लिखे हुए डायलॉग ही बोले थे.

हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं. एक वक्त अमिताभ और कादर खान के बीच भी कुछ मनमुटाव हुआ. एक इंटरव्यू में अमिताभ से अपने रिश्ते को लेकर कादर खान ने कहा था- 'अमिताभ के साथ जो मेरा रिश्ता था... जब वो MP (सांसद) बन गया..तो मैं खुश नहीं था. कादर खान ने कहा था कि अमिताभ ने उन्हें खुद राजनीति में जाने से मना किया था लेकिन उनके खुद राजनीति में जाने से वह आहत हो गए थे.

कादर खाने ने अमिताभ से अपनी नाराजगी के बारे में इंटरव्यू में कहा था, 'क्योंकि सियासत ऐसी है कि इंसान को बदलकर रख देती है. वो वापस जब आया तो मेरा अमिताभ बच्चन नहीं था. मुझे बहुत दुख हुआ. उसने मुझे भी ये कहा था कि सियासत वाले तुझे अगर ले जाना चाहे, या चाहेंगे तो मैं तेरे खिलाफ खड़ा होकर बोलूंगा ये आदमी गलत है, इसको वोट मत दो, हरवा दूंगा. मुझे तो हरवा देगा मगर खुद कैसे तू एमपी बनकर आया है. एमपी बनने के बाद वो बदल गया था.'

हालांकि, कुछ समय बाद ही दोनों मनमुटाव भुलाकर अच्छे दोस्त बन गए.

खान ने बाद में बताया था कि उन्होंने अमिताभ से बातकर सब कुछ सुलझा लिया था. उन्होंने लिखा था- 'बीच में (रिश्ता) थोड़ा नासाज हो गया था, मैं थोड़ा सा अपसेट था पर फिर उन्होंने (अमिताभ) मना लिया.' कादर खान के बेटे शाहनवाज ने बताया था- अब्बा जब हॉस्पिटल में एडमिट हुए तो भी उन्होंने अमित अंकल से बात की थी.

ये हैं आर्थिक आंकड़े जिनका 2019 चुनावों से पहले सरकार के पक्ष में होना जरूरी है 

वैश्विक संकट: भारत में तेज विकास दर ऐसी स्थिति में है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सिकुड़न के दौर में है. दुनिया की ज्यादातर बड़ी अर्थव्यवस्थाएं गंभीर चुनौतियों से घिरी है. अमेरिका और चीन के बीच शुरू हुए ट्रेड वॉर का असर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के साथ-साथ यूरोप और एशिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है. 2019 के दौरान ट्रेड वॉर और गंभीर चुनौती खड़ा कर सकता है जिसका खामियाजा भारत समेत कई एशियाई देशों को भुगतना पड़ेगा. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है. जहां 2018 में कच्चे तेल की कीमत में एक बार फिर इजाफा शुरू हुआ वहीं कच्चे तेल के उत्पादक खाड़ी देश 2014 से 2017 तक कमजोर कीमत के चलते कड़ी चुनौतियों में घिरे हैं. लिहाजा, 2019 के दौरान भारत के विकास की कहानी के लिए बेहद जरूरी है कि कच्चा तेल सामान्य दर पर उपलब्ध रहे जिससे सरकार के राजस्व पर अतिरिक्त बोझ न पड़े.

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