पुलवामा हमले के बाद सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरों और वीडियो की बाढ़ आ गई है जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वो हमले के घायल सैनिकों या फिर धमाके के हैं.
ज़्यादातर तस्वीरें और वीडियो जघन्य हैं. तस्वीरों में जवान ख़ून में सने दिख रहे हैं.
इन तस्वीरों और वीडियोज़ के साथ एक मैसेज भी शेयर किया जा रहा है ताकि लोग बदला लेने और हमले के लिए खुलकर सामने आएं.
इन पोस्ट पर हज़ारों की संख्या में कॉमेंट्स हैं. ज़्यादातर कमेंट्स में लोग कह रहे हैं कि सरकार पाकिस्तान पर जल्दी हमला करे.
पिछले हफ़्ते गुरुवार को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर हमला कर 45 से ज़्यादा जवानों की जान ले ली थी.
भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कई क़दम उठाए हैं. भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की बात भी कही है.
हालांकि सोशल मीडिया पर लोग इतने भर से शांत नहीं हो रहे हैं. लोग युद्ध की मांग कर रहे हैं.
हमारी जाँच में पता चला कि जो वीडियो और तस्वीरें शेयर किए जा रहे हैं उनका संबंध पुलवामा हमले से नहीं है. वायरल हो रहे कई वीडियो और तस्वीरें सीरिया, रूस और पुराने माओवादी हमले के हैं.
पुलवामा में हुआ हमला पिछले तीन दशक का सबसे बड़ा हमला कहा जा रहा है. सेना के कुछ अधिकारियों ने लोगों और मीडिया घरानों से आग्रह किया है कि वो हमले से जुड़ी तस्वीरें शेयर न करें.
एक तस्वीर शेयर की जा रही है जिसमें एक सैनिक के सीने पर चारों तरफ़ बैंडेज लगे हुए हैं लेकिन वो अपनी राइफ़ल को उठाए आगे बढ़ रहा है. वहां खड़े लोग उस सैनिक को हैरानी भरी निगाहों से देख रहे हैं.
इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा हुआ है, "सेना को खुली छूट मिलने के बाद अब कोई भी क़दम उठाने की पूरी आज़ादी है. इस जवान ने हॉस्पिटल से अपना इलाज छोड़ अपने साथियों का बदला लेने के लिए बंदूक ले निकल गया. हमारी सेना की ताक़त यह है. जय हिन्द, वंदे मातरम.''
लेकिन सच यह है कि ये तस्वीर रूसी सैनिक है. रिवर्स सर्च से पता चलता है कि तस्वीर साल 2004 की है जब चरमपंथियों ने एक स्कूल को अपने क़ब्जे में ले लिया था. इस हमले में सैकड़ों लोगों की जान गई थी.
इस वीडियो में दिख रहा है कि एक गाड़ी एक चेक पॉइंट के क़रीब आ रही है और वो आग की लपटों के बीच से निकल जाती है.
इस वीडियो को पुलवामा हमले का वीडियो बताया जा रहा है. कुछ लोगों ने लिखा है कि पुलवामा में जहां हमला हुआ था वहां सीसीटीवी कैमरा लगा था और ये उसी का फ़ुटेज है.
हालांकि वीडियो को देखकर ही लगता है कि इलाक़ा और आसपास दिख रही चीज़ें कश्मीर के नहीं हैं.
जब हमने वीडियो पर रिसर्च की तो पता चला कि ये सीरिया में हुए एक कार बम हमले का है.
12 फ़रवरी को इसराइली अख़बार हअरज़ ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस वीडियो को शेयर किया था.
एक तस्वीर भारत के राष्ट्रध्वज तिरंगे में लिपटे ताबूतों की है जो बहुत शेयर की जा रही है. इसे भी पुलवामा में मारे गए सैनिकों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.
लेकिन ये तस्वीर छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में 2017 में नक्सलियों के हमले में मारे गए सीआरपीएफ़ जवानों की है.
कई लोग और यहाँ तक कि नेता भी इन्हीं तस्वीरों को पुलवामा हमले के नाम पर साझा कर रहे हैं जबकि ये सभी पुरानी तस्वीरें हैं.
ज़्यादातर तस्वीरें और वीडियो जघन्य हैं. तस्वीरों में जवान ख़ून में सने दिख रहे हैं.
इन तस्वीरों और वीडियोज़ के साथ एक मैसेज भी शेयर किया जा रहा है ताकि लोग बदला लेने और हमले के लिए खुलकर सामने आएं.
इन पोस्ट पर हज़ारों की संख्या में कॉमेंट्स हैं. ज़्यादातर कमेंट्स में लोग कह रहे हैं कि सरकार पाकिस्तान पर जल्दी हमला करे.
पिछले हफ़्ते गुरुवार को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर हमला कर 45 से ज़्यादा जवानों की जान ले ली थी.
भारत ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कई क़दम उठाए हैं. भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की बात भी कही है.
हालांकि सोशल मीडिया पर लोग इतने भर से शांत नहीं हो रहे हैं. लोग युद्ध की मांग कर रहे हैं.
हमारी जाँच में पता चला कि जो वीडियो और तस्वीरें शेयर किए जा रहे हैं उनका संबंध पुलवामा हमले से नहीं है. वायरल हो रहे कई वीडियो और तस्वीरें सीरिया, रूस और पुराने माओवादी हमले के हैं.
पुलवामा में हुआ हमला पिछले तीन दशक का सबसे बड़ा हमला कहा जा रहा है. सेना के कुछ अधिकारियों ने लोगों और मीडिया घरानों से आग्रह किया है कि वो हमले से जुड़ी तस्वीरें शेयर न करें.
एक तस्वीर शेयर की जा रही है जिसमें एक सैनिक के सीने पर चारों तरफ़ बैंडेज लगे हुए हैं लेकिन वो अपनी राइफ़ल को उठाए आगे बढ़ रहा है. वहां खड़े लोग उस सैनिक को हैरानी भरी निगाहों से देख रहे हैं.
इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा हुआ है, "सेना को खुली छूट मिलने के बाद अब कोई भी क़दम उठाने की पूरी आज़ादी है. इस जवान ने हॉस्पिटल से अपना इलाज छोड़ अपने साथियों का बदला लेने के लिए बंदूक ले निकल गया. हमारी सेना की ताक़त यह है. जय हिन्द, वंदे मातरम.''
लेकिन सच यह है कि ये तस्वीर रूसी सैनिक है. रिवर्स सर्च से पता चलता है कि तस्वीर साल 2004 की है जब चरमपंथियों ने एक स्कूल को अपने क़ब्जे में ले लिया था. इस हमले में सैकड़ों लोगों की जान गई थी.
इस वीडियो में दिख रहा है कि एक गाड़ी एक चेक पॉइंट के क़रीब आ रही है और वो आग की लपटों के बीच से निकल जाती है.
इस वीडियो को पुलवामा हमले का वीडियो बताया जा रहा है. कुछ लोगों ने लिखा है कि पुलवामा में जहां हमला हुआ था वहां सीसीटीवी कैमरा लगा था और ये उसी का फ़ुटेज है.
हालांकि वीडियो को देखकर ही लगता है कि इलाक़ा और आसपास दिख रही चीज़ें कश्मीर के नहीं हैं.
जब हमने वीडियो पर रिसर्च की तो पता चला कि ये सीरिया में हुए एक कार बम हमले का है.
12 फ़रवरी को इसराइली अख़बार हअरज़ ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस वीडियो को शेयर किया था.
एक तस्वीर भारत के राष्ट्रध्वज तिरंगे में लिपटे ताबूतों की है जो बहुत शेयर की जा रही है. इसे भी पुलवामा में मारे गए सैनिकों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.
लेकिन ये तस्वीर छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले में 2017 में नक्सलियों के हमले में मारे गए सीआरपीएफ़ जवानों की है.
कई लोग और यहाँ तक कि नेता भी इन्हीं तस्वीरों को पुलवामा हमले के नाम पर साझा कर रहे हैं जबकि ये सभी पुरानी तस्वीरें हैं.
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